निवासी-बायरन बाज़ार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक-""भावना "" ।
विधा--मुक्त ।
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===|||○भावना ○|||===
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मानव मन में--
जब उठती है ' भावना ' --
कभी सहयोग की,तो--
कभी विरोध की ।
अपनापन जिससे होता ---
उससे,सहयोग की भावना होती ।
इसके विपरीत,लगाव न हो तो ,
रखते,उससे नफ़रत ।
दुनियाँ में,कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,
अपना बनाकर,भावना से,
अक्सर खिलवाड़ हैं,करते--।
मंदिर में,भक्त की नजर--
मूर्तियों की खूबसूरती में--
और चोर की नजर जेवर में,
यहाँ भावना का खेल देखो ,
वैसे तो,दोनों भक्त नज़र हैं आते --।
एक थे,दानवीर कर्ण--
एक थे,राजा हरिशचंद्र ,
दान कर दिया,सारा राज-पाट,
उदारता की भावना ने,
इन्हें बना दिया,महान्--।
सरहद पर,सैनिकों का मनोबल,
और देशभक्ति की भावना,
दिलाती है,उनको सदा सम्मान ।
सामाजिकता व नैतिकता में---
बड़े व छोटे भाई व जनों के बीच,
होता है,अक्सर आदर-सम्मान की,
भावना की अपनी अहमियत यारों--।
राष्ट्रवासियों में होनी चाहिये--
राष्ट्र-प्रेम,देशभक्ति की भावना,
देश के विकास व उत्थान में,
सहयोग की,सकारत्मक भावना ।
ज्वलंत समस्या है,वर्तमान की,
नैतिक मूल्यों में,हो रही गिरावट,
कहीं हो रहा है,बलत्कार,तो--
कहीं हिँसा व अत्याचार--
मानवता की भावना मर रही है,
ये कैसा,परिवर्तन दिख रहा आज--।
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व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति में आज के परिवेश में नैतिक मूल्यों में गिरावट क्यों हो रही है ।इस समाज के सभी लोगों को ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है ।
*******मौलिक-प्रस्तुति **********
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