जिला- रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय- भावना
विधा- दोहा
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🔅भावना🔅
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सद्भाव से प्रेम बढ़े,करे दुर्भाव रार ।
जब ईर्ष्या मन व्याप्त हो,होत सदा तकरार।।
भक्ति भाव से रब मिले,मिले स्वर्ग का धाम।
उत्तम सेवा भाव से,मिलता जग में मान।।
मिलता ममता मात से,जो है निश्छल भाव।
भरती आँचल छाँव में,गहरा गहरा घाव।।
त्याग भाव से गुरु मिले, देते है जी ज्ञान।
भाव शिष्य सत्कार का,देता जी सम्मान।।
भातृ प्रेम के भाव से,चलता है संसार।
मीत सखा का भाव ही,बनता जीवन सार ।।
सात्विकता के भाव से,होगा ना सन्ताप।
गुण जो तामस का मिले,बढ़ता जाये पाप।।
जैसी तेरी भावना,वैसा होगा नाम।
होगी अच्छी भावना,बड़ा करोगे काम।।
मैलिक रचना
अजय पटनायक
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