सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-कविता
विषय-संगीत
शीर्षक-जीवन में संगीत
सात सुरों में पिरोई हुई
अंतर्मन की ध्वनि है संगीत
हृदय के तारों को जोड़ दे जो
ईश्वर से मिलन का द्वार है संगीत
सुबह में शाम में ,जीवन के हर पल में
हवाओ की थिरकन में ,सागर की लहरों में
चिड़ियों की चहचहाहट में, पहाड़ो की गूंज में
दिल की हर धड़कन में रची-बसी है संगीत
सबको एक सूत्र में बांध के रखती
गैरों में भी अपनापन,प्यार जगाती
सीमाओं के पार भी लांघ जाती
अपने सरगम से शांति का पाठ पढ़ाती
पिता के प्यार ,माँ की लोरी में है संगीत,
भाई की कलाई में बंधी डोरी में है संगीत
रज-रज में ,कण-कण में पत्तो की सरसराहट में
सांसो में,एहसासों में, क्षण-क्षन में है संगीत।
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