पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक- माँ की ममता
माँ की ममता
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माँ की ममता गंगा का पानी ,
इसकी है बड़ी अजीब कहानी,
बच्चों के लिए कुछ भी झेल जाती,
उनके लिए दुनिया से टकराती,
सेवा भाव से भरी माँ ,
सोना से भी खरे माँ ,
लाल के लिए देती बड़ी कुर्बानी,
माँ की ममता ...........
हो आँसुओं से भरी उसका आँचल,
बच्चों दुलराती माँ,
गाली देता बेटा फिर भी ,
अपने सीने से लगती माँ,
तकलीफों से लड़ती रही पर कभी न हार मानी,
माँ की ममता ............
माँ का दायरा आकाश जैसा,
जग में नही कोई ऐसा ,
उसके अंदर करुणा अपार ,
वत्सल बहे जस गंगा की धार ,
उसके जैसा नही कोई दानी ,
माँ की ममता .....
कपूत बन जाता बेटा अक्सर ,
पर माँ हमेशा महान है ,
निश्छल प्रेम बरसाने वाली ,
माँ सचमुच भगवान है ,
जिसके चरणों में संत और ज्ञानी ,
माँ की ममता ...............
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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