Monday, October 5, 2020

सावित्री यादव" सावि " की रचना- मिलन की आस

रचनाकार _सावित्री यादव" सावि "
                  बिलासपुर  छ. ग.               
शीर्षक _तुम्हारे मिलन की आस में 

तुम्हारे  मिलन की आस  मे, 
पल, दिन बीते मास मे  |
विहार वेदना सही नहीं जाती |
तुम्हारे बिन सांसे नहीं आती |
कब मिलो तो दिल की प्यास  बुझे  |
तुम मिलो तो दिल को कुछ सूझे |

हम तन्हा थक गए है |
बैठे  तुम्हारे इंतजार  मे, 
कब मिलो पिया तो बाते हो |
तुम्हारे  प्यार मे, 
ख़्वाबों मे आना ठीक नही |
रातो को जगाना ठीक नहीं |
जो दिल से तुम्हे चाहे उसे तड़पाना  ठीक नहीं |

कहते हो सारी बाते सच्ची |
पर हमको तो लगती है तुम्हारी शरारते अच्छी |
करो ना इस तरह की नादानियाँ कच्ची |
हम भी तेरे दिल भी तेरा ये मानो सच्ची |

अब आ भी जाओ की इंतजार खत्म हो |
दिल से दिल के मिलन की रस्म  हो |
बाते तो होंठ कर लेते है |
अब बाते मन, तन की कर लेते है |
तुम्हारे  मिलन की आस  मे, 
पल, दिन  बीते मास  मे, 
तुम्हारे मिलन की आस मे, 


रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
            

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