रचनाकार _सावित्री यादव" सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _तुम्हारे मिलन की आस में
तुम्हारे मिलन की आस मे,
पल, दिन बीते मास मे |
विहार वेदना सही नहीं जाती |
तुम्हारे बिन सांसे नहीं आती |
कब मिलो तो दिल की प्यास बुझे |
तुम मिलो तो दिल को कुछ सूझे |
हम तन्हा थक गए है |
बैठे तुम्हारे इंतजार मे,
कब मिलो पिया तो बाते हो |
तुम्हारे प्यार मे,
ख़्वाबों मे आना ठीक नही |
रातो को जगाना ठीक नहीं |
जो दिल से तुम्हे चाहे उसे तड़पाना ठीक नहीं |
कहते हो सारी बाते सच्ची |
पर हमको तो लगती है तुम्हारी शरारते अच्छी |
करो ना इस तरह की नादानियाँ कच्ची |
हम भी तेरे दिल भी तेरा ये मानो सच्ची |
अब आ भी जाओ की इंतजार खत्म हो |
दिल से दिल के मिलन की रस्म हो |
बाते तो होंठ कर लेते है |
अब बाते मन, तन की कर लेते है |
तुम्हारे मिलन की आस मे,
पल, दिन बीते मास मे,
तुम्हारे मिलन की आस मे,
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
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