जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-हँसी
विधा-कविता( मुक्त छंद)
जीवन एक सुंदर -सी बगिया
इसमें फूल भी हैं और कांटे|
हँसी है एक रामबाण औषधि,
कुदरत ने हैं मुफ्त में ही बांटे||
जीवन में है जितनी भी खुशियाँ,
उतने ही गम उतने ही उलझन|
हँसी है एक राम बाण औषधि,
इसे ही जीवन का अंग बनालें||
फूलों से नित हँसना सीखें हम,
नन्हें बच्चों से नित मुस्कुराना|
हँसी है एक राम बाण औषधि
नित दिन हँसना और हँसाना||
न पैसे से न ताकत से मिलता है,
उन्मुक्त हँसी बेमोल बिकता है|
हंँसी है एक राम बाण औषधि
इसे जीवन में सदैव अपनाना||
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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