Tuesday, October 13, 2020

छत्तीसगढ़ से सोमेश सिन्हा की रचना- व्यथा मन की

कवि का नाम- सोमेश सिन्हा
जिला- बलौदाबाजार
शीर्षक-व्यथा मन की
विधा- छंद मुक्त

चंचल है मन मेरा,
सुनता हर की व्यथा कथा है।
दुःख सुनकर किसीं का,
ये खुद उदास हो जाता है।
खुशी हो किसीं कि,
उल्लास में ये डूब जाता है।।
सब सह कर ये,
खुद में छिप जाया करता है।।
दुसरो की व्यथा कथा सुनकर,
उसी में खो जाया करता है।

पर मेरी व्यथा कौन सुने,
संसार तो खुद में व्यस्त है।
ठिठोली, अट्टहास के वक़्त,
संसार पुचकारता है।
मन की व्यथा सुनाने वाले को,
ये जमाना कमजोर मानता है।

कह सके हम भी, और लोग समझे,
हमारी भी मन की व्यथा।।।
सुनकर जमाने की कथा,
लगता है छिपाओ मन की व्यथा।
संघर्ष करो स्वयं मन से,
और शांत करो ये व्यथा।।


Copyright - सोमेश सिन्हा

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