Friday, October 2, 2020

गावस्कर कौशिक कृत आलेख- गाँधी जी के विचार

रचनाकार- गावस्कर कौशिक
जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
शीर्षक- गाँधी जी के विचारों की प्रासंगिकता
विधा-  आलेख
दिनाँक- 02/10/2020
----------------------------------------------------
गाँधी केवल एक नाम नहीं हैं, गाँधी एक विचार हैं जिसे पूजने से नहीं अपितु जीने से ही हम गाँधी जी को सच्ची श्रद्धाजंली दे सकते हैं।  गांधी जी ने जिन सामाजिक और राजनैतिक संचेतनाओं का सूत्रपात किया था, वह आज के दौर में और ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं। आज भूमण्डलीकरण के इस दौर में  शक्तिशाली राष्ट्र जिस तरह से हिसंक रूप अपनाकर समूचे विश्व में अपना एकाधिकार चाहता हैं। चारों तरफ भय व आतंक का साया हैं, समूचे विश्व डर और भय के आगोश में समाता जा रहा हैं।
जिस विस्तार वादी नीति के कारण समूचे विश्व को दो-दो विश्व युद्ध की विभीषिका झेलनी पड़ी। आज भी उसी नीति पर विश्व के अनेक राष्ट्र अग्रसर हैं। विश्व जितना सिकुड़ता जा रहा हैं, नफरत और युद्ध की विभीषिका उतना ही बढ़ता जा रहा हैं। समूचे विश्व में विध्वंसक और जैविक हथियारों के संग्रहण की होड़ लगी हुई हैं। पारस्परिक, एकता, समानता व् बन्धुता की भावना विलुप्त हो रही हैं। ऐसी परिस्थिति में समूचे विश्व के लिए गाँधी जी के सत्य और अहिंसा का मार्ग बहुत सटीक जान पड़ता हैं।
भारत की तो सदैव ही वसुदैव कुटुम्बकम की भावना रही हैं और भारत आज भी उसमें कायम हैं। वैश्विक पटल पर भारत आज भी शांति और भाईचारे के विचार के साथ खड़ा हुआ विश्व को शान्ति की राह दिखा रहा हैं।
वहीं अगर अपने देश के भीतर गांधी के विचारों पर नजर डाले तो कुछ अलग ही नजारा दिखलाई पड़ता हैं।
गाँधी जी ने कहा था कि "देश में स्वराज तभी आयेगा जब कोई भी गरीब भूखे नहीं सोयेगा" पर अफ़सोस गांधी को अपने आदर्श बताने वालों सफेद पोसों को गरीबों की बेबसी और लाचारी दिखलाई नहीं पड़ती हैं। प्राकृतिक संसाधनों पर पूंजीपतियों का एकाधिकार बढ़ता जा रहा हैं, गरीबों के आवाज को दबाया जा रहा हैं, उनके सपनों को कुचला जा रहा हैं। जात-पात और सम्प्रदाय वाद की आग में लोकतंत्र झुलस रहा हैं, आये दिन हो रही हिंसक घटनाएं और उस पर थोथी राजनीती गाँधी जी के विचारों पर थू थू कर रही हैं ।
केवल चुनाव और जयंती पर गाँधी को याद करने वाले, तथाकथित ! गाँधीवादी नेता गाँधी के विचारों को कितना मानते हैं किसी से छिपा नहीं हैं।
बहरहाल गाँधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे, वे शोषित और पीड़ित बहुजन के आवाज थे, नफरत के बंदूक से गाँधी जी को मारा जा सकता हैं, किंतु उनके विचारों को नहीं जो करोड़ों भारतीयों के दिल में बसा हुआ हैं।
            ~गावस्कर कौशिक

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...