रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-आलेख
विषय-अहिंसा के पुजारी गांधी जी
महात्मा ग़ांधी जी अपने जीवन पर्यन्त सबके लिए प्रेरणास्रोत रहे और आज भी वे आदर्श और प्रेरणा बने हुए हैं हम सबके लिए।हम अगर उनके दिए आदर्शों का कुछ अंश भी अपने जीवन मे उतार लें तो जीवन सार्थक हो जाएगा। उन्होंने कभी आडम्बर और दिखावा नही किया हमेशा सादगी भरा जीवन और उच्च सोच रखा।छुआछूत, भेदभाव, अमीरी-गरीबी से उनका सोच बहुत ऊपर था।
साबरमती आश्रम में उन्होंने कितनो को
आश्रय दिया सबके साथ मिलकर वे नोकरों का काम भी कर लेते।कभी किसी को छोटा बड़ा माना ही नही सब उनकी नज़र में बराबर थे।सत्य, अहिंसा और शांति के मार्ग में ही चले और लोगो को भी यही संदेश दिया।हाड़-मांस की काया को देखकर ही अंग्रेज काँपने लगते और बिना अस्त्र-शस्त्र के अंग्रेजो को निकाल बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
21वी सदी का ये भारत गान्धी जी के सपनों के भारत के विपरीत है।जहाँ पूंजीवाद,भुखमरी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार आदि अनेकोनेक बुराइयों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। गांधीगीरी की जगह नेतागीरी का ही बोलबाला है।
अंग्रेजों से आजाद हुए तो अंग्रेजी के गुलाम हो गए।इस भारत के लिए उन्होंने सबकुछ बलिदान कर दिया उन जैसे महापुरुष आज होते तो भारत की तस्वीर और तकदीर कुछ और ही होती।
No comments:
Post a Comment