पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
विधा - आलेख
विषय - समाचार पत्र
शीर्षक - समाचार पत्र का बदलता स्वरूप
समाचार पत्र का बदलता स्वरूप
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वर्तमान समय में हमारे पास सूचना ,संदेश, मनोरंजन या अन्य गतिविधियों की जानकारी के लिए कई माध्यम विद्यमान है। जैसे - टेलीविजन , कम्प्यूटर, लैपटॉप , मोबाइल इत्यादि परन्तु इन सबके होते हुए भी समाचार पत्र अपनी अलग छवि व विश्वसनीयता के चलते आज भी अपना अलग महत्व रखता है।समाचार पत्र भी वर्तमान में लोगों की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए नए कलेवर में अपने आप को सजा लिया है।पिछले कुछ वर्षों में समाचार पत्र सूचना ,संदेश ,देश-दुनिया , सामाजिक,आर्थिक , राजनैतिक गतिविधियाँ ,खेल , मनोरंजन आदि के साथ-साथ ज्वलंत मुद्दों पर ,स्वास्थ्य , शिक्षा , साहित्यिक गतिविधियों पर विशेषज्ञों की राय प्रकाशित कर अपना वर्चस्व पाठकों के बीच मजबूती से स्थापित किया है। जिससे युवाओं में समाचार पत्रों की ओर लगाव बढ़ा है। समाचार पत्र हमारे दैनिक जीवन के प्रत्येक कोने को छू कर विषय के प्रति जागरूक और संवेदनशील बना रहा है।
पिछले दशक में पत्रकारिता के क्षेत्र में तीव्रता से बदलाव आया है। पत्रकारिता में बाजार हावी होते जा रहा है।लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ बाजारूपन , राजनीतिक चाटुकारिता , मुद्दों पर स्वतंत्र मत का अभाव , आधुनिक फूहड़ता परोसते दिखाई देने के कारण अपना विश्वशनियता खोते नजर आ रहा है। बेशक देश की जनता को विभिन्न तात्कालिक मुद्दों की खबर होनी चाहिए और ये समाचार, समाचार पत्रों का हिस्सा हो परंतु केवल टीआरपी बढ़ाने के लिए वे मुद्दे बार -बार उछालना जिसका देश की अधिकांश जनता को कोई सरोकार नहीं यह तो सही नही। विज्ञापन का अपना अलग महत्व है पर कभी - कभी समाचार पत्रों में विज्ञापन ही विज्ञापन उसे पाठकों के बीच अरुचिकर बना देता है। कभी-कभी समाचार पत्रों की राजनीतिक चाटुकारिता के चलते जब ज्वलंत मुद्दों पर हुई वास्तविक प्रतिक्रिया को महत्व नही दिया जाता या उन मुद्दों पर निष्पक्षता नही दिखाई पड़ती तब लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ का ढांचा गिरता नजर आता है। शायद यह टेलीविजन की समाचार चैनलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की होड़ भी हो सकता है। जिस प्रकार साहित्य समाज का दर्पण होता है उसी प्रकार समाचार पत्र भी मार्गदर्शक होता है। शायद इसीलिए समाचार पत्रों के पाठक का मन भी उन सारे परिवर्तनों को वैसे ही स्वीकार करता है जैसे आकर्षक परोसा गया होता है। इन सब के बावजूद समाचार पत्र अपनी मौलिकता , संस्कारधारिता और बड़े पाठक वर्ग के साथ विभिन्न संचार माध्यमों के बीच अपनी जादू अनवरत बिखेरता आगे बढ़ते चले जा रहा है।
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