Thursday, October 8, 2020

नलिनी बाजपेयी कृत आलेख- समाचार पत्र

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर( छ. ग)
       विषय-समाचार पत्र
       विधा-आलेख

           *समाचार पत्र* 
          समाचार पत्र आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है, या कहिए समाचार पत्र सुबह की प्रथम आवश्यकता के रूप में आज जाना जाता है।  आजकल  लगभग सभी भाषाओं में समाचार पत्र प्रकाशित हो रहा है ।सारे विश्व की सामयिक घटनाएं ,राजनीति ,खेलकूद, विज्ञापन आदि की जानकारियां लोगों को आसानी से मिल जाती है ।वैसे तो समाचार समाचार पत्र दैनिक ,साप्ताहिक, मासिक, और छमाही भी होते हैं। आजकल समाचार पत्रों में स्थानीय विषयों के लिए एक आंचलिक  चार  पेज की व्यवस्था होती है ।उसका अलग ही महत्व है ।
         समाचार पत्र  का इतिहास के बारे में जानना चाहे तो छापे की पहली मशीन भारत में 1674 को पहूँची, मगर भारत में पहला अखबार 100 वर्षों बाद 1776 में प्रकाशित हुआ। इसके प्रकाशक ईस्ट इंडिया कंपनी का भूतपूर्व अधिकारी विलेम बाल्ट्स था। यह समाचार पत्र  अंग्रेजी में निकलता था ,तथा कंपनी व सरकार के समाचार फैलाता था। स्वतंत्र रूप उसे विचार व्यक्त करने वाला अखबार आया 1780 में ,जिसे जेम्स ऑगस्टस ने प्रकाशित करवाया।जिसे लोग *बंगाल गजट*के नाम से जानते थे।सन 1819 में पहली बार भारतीय भाषा में पहला समाचार पत्र संवाद कौमुदी* प्रकाशित हुआ। उसके प्रकाशक राजा राममोहन राय थे। उसके बाद गुजराती में *  *मुंबईना समाचार* इसके बाद *उदन्त मार्तण्ड* प्रकाशित हुआ।उसके बाद तो अखबारों की संख्या बढ़ती गई। पहले समाचार पत्रों में केवल खबरों का विवरण प्रकाशित होता था ।अब इसमें बहुत से विषयों के बारे में खबरें और विशेषज्ञों के विचार, यहाँ तक कि लगभग सभी विषयों की जानकारी होती है। समाचार पत्र लोगों की आवश्यकता और जरूरत के अनुसार लोगों को एक से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति करता है। समाचार पत्र बहुत ही प्रभावी और शक्तिशाली होते हैं, और संसार की सभी खबरें एक साथ एक ही स्थान पर पहुँचाता है
          आज प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण,व्हाट्सएप,, ट्विटर,फैक्स,इंटरनेट आदि  त्वरित संचार के साधन बन गए है।इसके बाद भी समाचार पत्रों का महत्व बरकरार है।
        अगर हम नियमित रूप से समाचार पढ़ने की आदत बनाते हैं यह हमारे लिए काफी लाभदायक हो सकता है। यह हमारे पढ़ने की आदत को विकसित करता है। हमारे प्रभाव में सुधार कर बाहरी जानकारी से अवगत कराता है।संक्षिप्त में कहा जाएं तो समाचार पत्र जीवन रेखा बन गई है।

      नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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