ग्राम -बुलाँकी
जिला -रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा कविता (मुक्तक छंद)
शीर्षक-"जागो सपूतों"
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*जागो सपूतों*
जागो देश के संस्कारिक सपूतों ,
नव भारत निर्माण करो ।
जन -जन के जीवन में पुनः ,
नई संचेतना संचार भरो।
नई आकाश है नया दिवाकर,
नई सुबह है, प्रकाश नई।
नई आशाएँ, नई उम्मीदे,
नई उमंगे ,बहारें नई।
कई वर्षों से मुरझाए चेहरों में,
मधुर -मधुर मुस्कान भरो।
जागो देश की संस्कारित सपूतों,
नवीन भारत निर्माण करो।।1।।
द्वारा -द्वार पर बैठे मनु कुछ,
नूतन सोच विचार करें ।
गुनगुनाती बालाएंँ खुशी से ,
मधुर गान सुनाया करें।
नव युग की नूतन स्वागत में ,
प्रेम राग नव गान भरो ।
जागो देश के संस्कारित सपूतों,
नवीन भारत निर्माण करो।।2।।
डाल -डाल पर बैठी पंछी कुछ,
नव कलरव राग सुनाते हैं।
गुनगुनाते भंवरे भी मस्त ,
बगियन में मंडराते हैं ।
रुष्ण कलियों में फिर से ,
नव रस मधुरम् मधु भरो ।
जागो देश के संस्कारित सपूतों,
नवीन भारत निर्माण करो।।3।।
नई, सोच है ,नवीन समझ है ,
नई उत्साह, नया पथ है ।
अपना पराया कर त्याग,
सख्य भाव का हो उद्गार।
दलित समाज में फिर से ,
प्रेम स्नेह नव भाव भरो।
जागो देश के संस्कारित सपूतों,
नवीन भारत निर्माण करो।।4।।
विद्यालय हो पावन मंदिर,
विद्या अधिकार है तुम्हारा।
तुम इसके संरक्षक सुरक्षक,
तुम्हीं इसके भागीदार हो ।
जन-जन ज्ञान दीप जलाकर,
नवयुग का आव्हान करो ।
जागो देश के संस्कारी सपूतों,
नवीन भारत निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में फिर से,
नई संचेतना संचार भरो।।5।।
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रचनाकार उर्मिला सिदार ग्राम बुलाँकी जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
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