रचनाकार - चेतन सिंह
पता -------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय ------- मां
विधा --------कविता
शीर्षक --
""" '""""'' माँ ""''''''''""""""""
___________________________________
माँ तू ही जननी , तू ही माता ,
तू ही पालनहार है !
माँ तू ही देवी , तू ही ईश्वर ,
तू ही तारणहार है !
तुझ बिन सूना मेरा जीवन ,
जो तू है , तो खुशियां अपार है !
तेरी आँचल की छाँव को ,
माँ कैसे मैं भूला दूं !
जब मैं रोता था कहती थी ,
आ। मैं सुला दूं !
अमृत सा तेरा दूध ,
मेरे कण्ठ में उतर गया !
सच कहता हूँ माँ ,
मेरा जीवन संवर गया !
तेरी मैं पूजा करुँ ,
तुझको नमन बारंबार है !
तू ही जननी , तू ही माता ,
तू ही पालनहार है ! !
मेरे हर क्रंदन पर ,
माँ तू संग - संग रोई थी !
मेरा दर्द , मेरी तकलीफ पर ,
माँ तू भी न सोई थी !
उठना - बैठना ,हंसना - मुस्कुराना ,
माँ तूने ही सिखाया है !
दुनिया की आबो -हवा ,
माँ तूने ही दिखाया है !
मेरे जीवन की मांझी तू ,
माँ तू ही पतवार है !
माँ तू ही जननी, तू ही माता ,
तू ही पालनहार है !
मेरी एक मुस्कान पर ,
मंद - मंद तू भी मुस्काती थी माँ !
मेरे कदमों की हर आहट पर ,
तू और निखर जाती थी माँ !
मेरी खुशियों की खातिर ,
रखे तुमने उपवास कई ,
ज्वर भी हो जाए मुझको तो ,
तू सिहर जाती थी माँ !
तुच्छ मिट्टी में जान फूंकी ,
माँ तू वो कुम्हार है !
माँ तू ही जननी , तू ही माता ,
तू ही पालनहार है !
खडा हूँ मैं अपने पैरों पर ,
माँ तेरी ही कोशिश से !
मैं कुछ कर पाऊँ इस काबिल बना,
माँ तेरे ही आशीष से !
मेरी कलम में वास तेरा ,
शब्दों में तू ही बसी ,
मेरी क्या औकात रचना करूं ,
लिखता हूँ माँ तेरी ही ख्वाहिश से !
माँ तुझको क्या मैं अर्पण करूं ,
तुझ पर मेरा जीवन निसार है !
तू ही जननी , तू ही माता ,
तू ही पालनहार है !
Friday, October 16, 2020
चेतन सिंह की रचना- मां
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
No comments:
Post a Comment