Saturday, October 10, 2020

मोनालिसा बेहरा की रचना- आना जाना

        रचियता -श्रीमती मोनालिसा बेहरा
        रायगढ़, छत्तीसगढ़
        विधा-मुक्त छंद रचना
        शीर्षक-यूँ आना और यूँ चले जाना                 

खामोशी से आना और यूँ खामोश चले जाना
कुछ पल जिंदगी के देकर यूँ गुमनाम हो जाना
कहाँ तलाशे तुमको ना पता ना कोई ठिकाना
क्या ऐसा भी होता है यूँ आना और यूँ चले जाना??

हजारों सवालो के घेरे में गिरप्त हो जाना
एक लंबी रात के अंधेरे में तुम्हारा खो जाना
एक उजाले की आस में पूरी - पूरी रात का बीत जाना
क्या यही सच है तुम्हारा यूँ आना और यूँ चले जाना??

गुजरते वक्त के साथ हंसी का गुजर जाना
लम्हा - लम्हा बस तुम्हारी ही याद आना
साथ बिताए पलों का भी यूँ साथ छोड़ जाना
कैसे भूल पाएंगे तुम्हारा यूँ आना और यूँ चले जाना??
                                       श्रीमती मोनालिसा बेहरा

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