Saturday, October 10, 2020

सावित्री यादव "सावि " की रचना बेगाना

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
               बिलासपुर छ. ग. 
               शीर्षक -हमें बेगाना कर जाते हो |

ज़ब साथ होते हो बस उस पल हीतुम अपने होते हो |
जाने के बाद हमे बेगाना कर खुद क्यों बेगाने बन जाते हो |

कई  बार कहा  हमने तुम्हे दिल की समझो |
बस थोड़ा सा प्यार चाहा बस उसको ही माँगा करेंगे |

कभी तो दिल की समझते हमें अपनों मे गिनते |
हर बात पे अलग कर दिया हर राह मे अकेले छोड़ दिया |

हमारे अपनों की गिनती मे तुम्हारा  नाम रहेगा हमेशा  |
तुम भूल जाओ क़ोई गम नहीं पर कभी तो समझो प्रेम की भाषा |

हर खता माफ़ करते है तुम्हारी अब समझो तो कितना चाहते  है तुमको |
हमें तुम्हारी थोड़ी परवाह चाहिए इतना अहसास करवाओ हमको |

की तुम्हारे दिल मे भी थोड़ी जगह है हमारी |
बस इतनी सी  इनायत चाहिए  तुम्हारी |

क्या चाहते है हम बस समय,प्यार,  परवाह |
इसके सिवाय दिल को तुमसे नहीं क़ोई चाह |

अब समझो बात की गहराई |
तुम साथ हो तो दूर भागे तन्हाई |

बस प्यार, प्यार और प्यार |
ना घर -बार ना अधिकार  चाहिए |
हमें आपसे केवल प्यार चाहिए |
क्यों हमें बेगाना कर जाते हो |
क्यों हमें बेगाना  कर जाते हो |

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
              

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...