रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक -हमें बेगाना कर जाते हो |
ज़ब साथ होते हो बस उस पल हीतुम अपने होते हो |
जाने के बाद हमे बेगाना कर खुद क्यों बेगाने बन जाते हो |
कई बार कहा हमने तुम्हे दिल की समझो |
बस थोड़ा सा प्यार चाहा बस उसको ही माँगा करेंगे |
कभी तो दिल की समझते हमें अपनों मे गिनते |
हर बात पे अलग कर दिया हर राह मे अकेले छोड़ दिया |
हमारे अपनों की गिनती मे तुम्हारा नाम रहेगा हमेशा |
तुम भूल जाओ क़ोई गम नहीं पर कभी तो समझो प्रेम की भाषा |
हर खता माफ़ करते है तुम्हारी अब समझो तो कितना चाहते है तुमको |
हमें तुम्हारी थोड़ी परवाह चाहिए इतना अहसास करवाओ हमको |
की तुम्हारे दिल मे भी थोड़ी जगह है हमारी |
बस इतनी सी इनायत चाहिए तुम्हारी |
क्या चाहते है हम बस समय,प्यार, परवाह |
इसके सिवाय दिल को तुमसे नहीं क़ोई चाह |
अब समझो बात की गहराई |
तुम साथ हो तो दूर भागे तन्हाई |
बस प्यार, प्यार और प्यार |
ना घर -बार ना अधिकार चाहिए |
हमें आपसे केवल प्यार चाहिए |
क्यों हमें बेगाना कर जाते हो |
क्यों हमें बेगाना कर जाते हो |
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
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