रचनाकार- अजीत ठाकुर
राज्य- छत्तीसगढ़
जिला- कांकेर, पखांजूर
हे माँ दुर्गे देश को वरदान दो।
अंधकार में है देश हमारा इसको भिनसार दो। आज देश के युवा विदासपूर्ण जीवन जी रहे।
इनके अंदर तुम माँ उत्साह का संचार दो।
हे माँ दुर्गे देश को वरदान दो। ।
ले रूप चंडी का मां तुम इनके अंदर से अहंकार को निकाल दो।
देशभक्ति की भावना को माँ उनके अंदर उतार दो।
कर्तव्य पूर्ण जीवन फिर वह व्यतीत करेंगे।
अपने अंदर वे फिर उमंग जोश भरेंगे।
ऐसी गुणों का माँ उनमें प्रवाह दो। ।
हे माँ दुर्गे देश को को वरदान दो। ।
ये देश के युवा देश के भविष्य है। इन युवाओं को माँ युद्ध रण में उतार दो। इनके नसों में माँ गर्म रक्त का संचार दो।
वीरता का इनके अंदर माँ शमशीर को उतार दो।
चढ़ा दो इनको बुलंदियों में चांद को वह छू लेंगे ।
अपार संभावनाओं का माँ उनमें भंडार दो।
हे माँ दुर्गे देश को को वरदान दो। ।
आने वाला इतिहास फिर से लिखा जाएगा।
युवाओं के जोश को फिर वह दोहराएगा।
जन्म लेंगे देश में फिर कई भगत, आजाद।
ऐसी शिक्षा का माँ उनमें ज्ञान को उतार दो।
ना स्वार्थ की हो भावना ना होंगे वे स्वार्थी। अपने मां-बाप के वे बनेंगे सारथी । एक बार फिर मां जन्नत से श्रवण को उतार दो।
मातृ पितृ भक्ति को माँ उन में उतार दो।
फिर कोई मां-बाप ना बुढ़ापे में रोएगा ।
दो गी जो श्रवण को वे उन्हें ढोएगा।
ऐसे गुणों का मां हर संतान में वरदान दो।।
हे मां दुर्गे देश का वरदान दो, देश को वरदान दो। ।
(अजीत ठाकुर, पखांजूर)
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