उसूल"
तुम पुराने उसूलों पर अड़े हो,
इसलिए तुम जहां थे वहीं खड़े हो।
देश को आजाद कराने के लिए,
क्या तुम सब इसलिए लड़े हो।
सुधारना है लोगों के विचारों को,
तुम विचार क्रांति के इंतजार में पड़े हो।
जानते हो गलती की है उसने,
फिर भी उसे माफ कर अपनों में बड़े हो।
सबकी खुशियां बढ़ाने के लिए,
खुद पैंट में अपनी टाट का पैबंद जड़े हो।
तुम पुराने उसूलों पर अड़े हो,
इसलिए तुम जहां थे वहीं खड़े हो।।
No comments:
Post a Comment