जिला,राज्य: मैसूर, कर्नाटक,
विधा: कविता
शीर्षक: आया सावन झूम के...
आया सावन झूम के.....
देखो देखो,आया,आया सावन झूम झूम के,
आओ देखें प्रकृति के नजारे खुशी खुशी से,
नभ में बादल दौड़ रहे घुमड़ घुमड़ कर,
और मोर भी नाच रहे अपने पंख फैलाकर।
माटी की भीनी,सोंधी खुशबू है फैल रही,
कोयल की मतवाली कूक भी है गूंज रही,
पवन भी मस्ती में झूम रहा सर सर सर,
नदिया भी शोर मचा बहती कल कल कल।
देखो देखो अंबर से भी टप टप बरसे पानी,
और सूरज खेलें हमसे आंख मिचौली।
प्रकृति में छाई है कैसी सुंदर हरियाली,
मस्ती में झूला झूल रही सखियों की टोली।
सावन का मनभावन मौसम सुहावना लागे,
वर्षा की झड़ी में दिखाई देते रंग बिरंगे छाते,
छोटी छोटी सावन की डोकरी अाई कहां से,
रात जगमगाती जुगनू,चंदा की चांदनी से।
देखो देखो,आया आया, सावन झूम के,
साथ लाया पल त्यौहारों, खुशियों के,
भूलें,दुख दर्द,गिले,शिकवा, शिकायतें,
सभी आनंद उठाएं सावन के इन पलों से।
रचियता:
डॉ बी.निर्मला,
मैसूर,कर्नाटक।
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