Monday, October 5, 2020

उर्मिला सिदार की रचना- पर्यावरण

रचनाकार -उर्मिला सिदार
 जिला- रायगढ़( छत्तीसगढ़)
 विधा -कविता 
शीर्षक -पर्यावरण 

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             *पर्यावरण*

 आओ हम पर्यावरण सजाएँं ,
 धरा से प्रदूषण भगाएँं  ।
 शुद्ध जल हो शुद्ध हवाएंँ ,
 शुद्ध धरा हो शुद्ध मृदाएँ।
 आओ हम पर्यावरण सजाएँं।

वनस्थली हो या हो मैदान ,
बंजर जमीन हो या पठार ।
विपुल पौधे हम लगाएँं ,
आओ पर्यावरण हम सजाएँं।

जीव जंतुओं का करे संरक्षण,
पोषण हेतु हम सजाएँ वन।
जीना साथ सभी का बन जाए,
आओ हम पर्यावरण सजाएंँ।

पर्यावरण जीने का है आधार,
पर्यावरण से न करो अत्याचार।
पर्यावरण है ,अस्तित्व हमारे,
आओ हम पर्यावरण सजाएँ।

स्वास्थ्य मन हो, स्वास्थ्य तन हो,
स्वच्छ वातावरण,सुन्दर जग हो।
ऐसा  सुविचार सुपथ हम लाएँ,
आओ हम पर्यावरण सजाएंँ।

 समृद्ध परिवार ,मानत्व जन हो,
 स्वच्छ गांँव, अभय समाज हो।
 ऐसी वातावरण हम बनाएंँ,
आओ हम पर्यावरण सजाएंँ।

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 उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़

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