स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता मुक्त
शीर्षक--गान करो
वही कविता गान करो,जो इंसान बनाती है ।
राहों से कांटे हटते, और पुष्प खिलाती है ।
यही जरुरत सबको है।
अब को है तब को है ।
बाकी सब मिट जाते , यही थाती सुहाती है ।
इंसानियत जिससे जगे ।
ध्यान उसमें अपना रखे ।
भूलने नहीं देती कुछ भी, उसका पाठ पढ़ाती है ।
कामयाबी के राह कठिन ।
कोई भी तुम काम करो ।
लाभ छोड़ो परहित में, दुनियां शीश झुकाती है ।
अंधेरे में चाहिए रोशनी ।
तब उजाला आएगा ।
एक बार जो जला दीपक, रोशनी वहां आ जाती है ।
सफलता की हाथ में कूंजी ।
बस उसका उपयोग करो ।
चाहे जो भी हो देखेंगे,यह सफलता दिलाती है ।
व्याख्या--कवि के द्वारा उस कविता की गान करने की बात कही गई है जिस कविता से इंसानियत उत्पन्न हो ।
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