स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- लघु-कथा
शीर्षक -"परिवर्तन "
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रमा मुझे दुकान में दीखी चेहरे पर वही रौनक थी पर बातचीत बेरुखीे लिए हुए था। उसे देख मुझे सीता याद आई और मैं नाम ली ही थी कि सीता भी आ गई। रमा को देखते ही उसका चेहरा खील उठा बड़े ही प्यार से मुझसे बातें करने लगी और रमा समान लेकर ऐसे चलते बनी जैसे उसे पहचानती ही ना हो । शादी के बाद दोनों की मित्रता में पैसों और रुतबे का परिवर्तन आ गया था।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है ,पर गहरी मित्रता के व्यवहार में इस तरह परिवर्तन आना क्या सही है?
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