पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विषय :- परिवर्तन
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
जैसे दिन के बाद रात का ढलना जरुरी है |
समय का काम है चलना आगे बढ़ना जरुरी है |
नियम परिवर्तन है प्रकृति का इसमें चलना जरुरी है |
कली से फूल बन महकना जरुरी है |
कभी सुख का अनुभव तो दुःख को सहना जरुरी है |
नियम परिवर्तन है प्रकृति का इसमें चलना जरुरी है |
सर्दी की ठंडी हवाएं ,बसंत बहार लाती है |
पतझड़ बिखरे बाग़ को सजा जाती है |
गर्मी की प्यासी धरती को बारिश की बूंदें भिगाती है |
अमावश के बाद पूनम जगमगाती है |
जगत के संतुलन के लिए मौसम का बदलना जरुरी है |
नियम परिवर्तन है प्रकृति का इसमें चलना जरुरी है |
बचपन के सुहाने दिन जवानी में बदलते हैं |
जवानी के लड़कपन फिर बुढ़ापे में खलते हैं |
घर की नन्ही किलकारी बच्चों से माँ बाप बनते हैं |
उम्र के नए पड़ाव में नए नए रिश्ते गढ़ते हैं |
चार दिन की जिंदगानी जो आया उसका जाना जरुरी है |
नियम परिवर्तन है प्रकृति का इसमें चलना जरुरी है |
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