राज्य- छत्तीसगढ़
जिला- बलौदा बाजार
शीर्षक- जिंदगी थम सी गई
विधा- छंद मुक्त
जिंदगी थम सी गई.....
पेड़ की टूटी पत्तियों की तरह....
जिंदगी बिखर सी गई।।
तुम हो नही तो...
जिंदगी मेरी थम सी गई।।
वक़्त भी रेत की तरह...
हाथों से फिसल गई।।
क्या ठंडक थी रिश्ते में...
जो अब जम सी गई।।
तुम्हे सुनने को काने....
मेरी तरस सी गई।।
इंतज़ार की चिंगारी,
अब बुझ सी गई।।
किस मोड़ पर थी जिंदगी,
जो राह अब भटक गई।।
अफसोस है दिल मे,
केवल तेरी कमी रह गई।।
अधूरी इस मोहब्बत में,
जिंदगी मेरी खत्म सी हो गई।।
सोमेश सिन्हा मुसाफिर
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👌👍mama (mai Khushboo)
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