Tuesday, October 13, 2020

बेमेतरा से सत्यधर बान्धे "ईमान" की रचना- मौत की ही द्वार

रचनाकार - सत्यधर बान्धे "ईमान" 
जिला - बेमेतरा (छत्तीसगढ़) 
शीर्षक - मौत का ही द्वार है 
विधा - मनहरण घनाक्षरी छंद 

                       1.

तन-मन नाश किया, पूरा ही विनाश किया
जन-जन पर आज, नशा का ही मार है ।

लोग भले मर रहें, शूली पर चढ़ रहें
उनका तो फल-फूल, रहा जी व्यापार है ।

छोटे-बड़े जाने नहीं, नेकी-बदी माने नहीं
ऊँचे-ऊँचे महलों में, बड़ा कारोबार है ।

एक बार मौज लगे, फिर लत रोज लगे
पीछा नहीं छोड़े ये तो, मौत का ही द्वार है ।।

                         2.

दामन में दाग लगे, चारों ओर आग लगे। 
बडे़ - बडे़ नाम भी तो, हुए तार-तार है।। 

बडे़ जिसे मानते थे, नेक बड़ा जानते थे। 
नशा का तो आज वही, हुआ जी शिकार है।। 

जिस पर मरते हैं, देख आहें भरते हैं। 
पता चला आज वही, खुद ही बिमार है।। 

नशे में ही घुल जाना, सब कुछ भूल जाना। 
मानसिक रोग का ये, कैसा उपचार है।। 


सत्यधर बान्धे "ईमान"
बेमेतरा छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...