Tuesday, October 13, 2020

महासमुंद से पुष्पा ग़जपाल "पीहू" की रचना- धरती

नाम - पुष्पा ग़जपाल "पीहू"
जिला/महासमुंद
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - "धरती माँ की बिटिया"
विधा -  गीत

मेरे बिन जाने ना जग  में ,  
     कोई जीवन की गहराई ।।
मैं  नारी  माँ , बेटी  पत्नी , 
     दुनिया को सुंदर सजाई ।
फिर भी मैं ही क्यों रातों में , 
     निर्मम जाती हूँ जलाई।।
मैं तो धरती माँ की बिटिया , 
    पर  होती  हूँ क्यों पराई।
मैं तो धरती ......

स्वार्थ  भरे इस संसार में ,
     क्या मेरी  पहचान नही?
नारी बिन है पुरुष अधूरे ,  
     करते क्यों सम्मान नही?
कातिल लूटेरों की दुनिया,
     मैं   लूँ  कैसे     अंगड़ाई ?
मैं तो  धरती माँ की बिटिया ,
     पर  होती   हूँ  क्यो  पराई?
मैं तो धरती माँ  .......

रंगीन जग का पीर सहती, 
    सुख-दुःख सभी का जानू मैं।
कर्म क्षेत्र में आगे बढ़ कर ,
    सब को अपना ही मानू मैं ।
सृष्टि में नैतिकता ,सभ्यता,
    संस्कार भी मैं ही  जगाई ।
मैं तो धरती माँ की बिटिया , 
   पर  होती  हूँ क्यों पराई ।।
मैं तो धरती...........

मन्दिर में  देवी  की  मूरत,  
    मैं  हूँ  पूजा  की  थाली ।
वेदों , पुराणों  का मंत्र  मैं  ,
   मैं  ही  पूरब  की  लाली ।।
दुनिया के कण-कण में देखो ,
   मैं   ही  खुशबू सी समाई।
मैं तो धरती माँ की बिटिया , 
  पर  होती  हूँ  क्यों पराई ।
 मैं तो धरती माँ.......
                  
                 धन्यवाद ,जय हिंद

पुष्पा ग़जपाल "पीहू"
महासमुंद (छ. ग.)

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