Friday, October 9, 2020

मीरा आर्ची चौहान की रचना- उसकी संवेदना

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-दार्शनिक
विधा-कविता (मुक्त छंद)

उसकी संवेदना,कोमल मन,
फूलों की खुशबू -सा एहसास
भावनाओं की अभिव्यक्ति में
लोरी का मधुर ध्वनि सुनकर|

मेरी भावनाओं का मंत्र  गूंज
उठा था और मैं दार्शनिक की
तरह मंत्र मुग्ध हो उस नन्हीं
परी को निहारे जा रही थी |

जो अंजुरी में   पिला रही थी
पानी सूखे पौधों को दौड़कर
नन्हीं बच्ची में  परमात्मा के
अद्भुत रुप के दर्शन हुए मुझे|

जड़- चेतन के ऊहा पोह में
कुल्हाड़ी लिए मानव काट
रहा था अपने आप संस्कृति
के जड़ों को संवेदना विहीन
दानव की तरह बारी -बारी से|

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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