जिला :- महासमुन्द
विषय :- दार्शनिक
शीर्षक :- दर्शन
विधा :- छंद मुक्त कविता
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मीमांसा, न्याय, वैशेषिक,
सांख्य, योग, वेदांत।
वैदिक प्रथा के छः दर्शन,
रखते उर को शांत।
अवैदिक दर्शन दिया,
चार्वाक, बौद्ध महान।
अवैदिक ही जाने जग,
जैन दर्शन के ज्ञान।
आधुनिक काल में अरविंद ने,
दिया दर्शन का ज्ञान।
पाठ पढ़ाकर गांधी, टैगोर भी,
हो गए जग में महान।
विवेकानंद, राधाकृष्णन,
रजनीश, रंजन सरकार।
दर्शन का दे ज्ञान जग को,
किया हृदय भाव उद्गार।
दर्शन क्या है कहकर जब,
कोई पूछे तुम्हें किसी रोज।
कह देना दर्शन विद्या है जो,
करें सत्य व ज्ञान की खोज।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने दर्शनशास्र को शब्दबद्ध करने का प्रयास किया है जिसमें उन्होंने दर्शन क्या है? एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य में दर्शन का वर्णन किया है।
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