स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय-दार्शनिक
शीर्षक-मानव हर पल खोजता
छोटा-सा मन मस्तिष्क, लाखों विचार धाराएं ।
वर्तमान भूत भविष्य, आशाएं निराशांए ।
उसी का परिणाम हम, आगे बढ़ रहे।
जो भी समस्या आए सामने, उससे लड़ रहे ।
वर्तमान जो है हमारा,सब उससे पाएं ।
मानव था कैसे पहले, और आज कैसा है ।
बदल रहा पल पल,जो अंदाज जैसा है ।
जिससे मानव का विकास दिखे,वह राह अपनाएं ।
स्वर्ग है कल्पनाओं में, साकार किया जाए ।
अगर पाया जा सकता है, विचार किया जाए ।
जो कदम अब तक न उठी,आओ हम उठाएं ।
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