स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-आलेख
विषय-महात्मागांधी
शीर्षक-शिक्षा से सर्वांगीण विकास
गांधी जी का पूरा नाम मोहन दास था। गांधी जी का जन्म 2अक्टूबर 1869को पोरबंदर गुजरात में हुआ था । इनके पिता का नाम करम चंद गांधी और माता जी का नाम पुतलीबाई था । गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई । गांधी जी गणित विषय से काफी भयभीत रहते थे । उन्होंने गणित विषय में अपने सहपाठियों से खुद को कमजोर मानते थे उनकी गणित विषय पर पकड़ अच्छी नहीं थी ।
विद्यालय में गांधी जी की उपस्थिति जैसे घण्टी बजती थीं पहुंच जाते थे और छुट्टी की घण्टी बजने के बाद ही घर आते थे ।
गांधी जी शिक्षा से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है इसके प्रबल समर्थक थे उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण का आधार माना गांधी जी रोजगार मूलक शिक्षा पर जोर देते थे उनका मानना था हमारी शिक्षा में वो गुण होना चाहिए जो नैतिक मूल्यों की वृद्धि के साथ- साथ हमें स्वावलम्बी बना सके । अगर व्यक्ति स्वावलम्बी होगा तो अन्य उत्तर दायित्वों की ओर आकर्षित होगा जिसके कारण अनेक मानवीय आवश्यक जो गुण हैं उसका अपने आप विकास कर पायेगा एवं उसकी भागीदारी निश्चित होगी ।
सत्य, अहिंसा,त्याग, बलिदान, सेवा,हित आदि पर अपना अमूल्य समय का उपयोग कर सकता है । शिक्षा के लिए उन्होंने कई सिद्धांतों का निर्माण किये एवं उस पर चलने के लिए प्रेरित भी करते थे । गांधी जी की शिक्षा की जो आधार है भारत में ही नहीं अपितु विश्व के देशों ने स्वीकार किया है प्रगति पर है । गांधी जी एक महान दार्शनिक चिंतक एवं राजनितिज्ञ पुरुष थे । उनके अथक परिश्रम से ही भारत स्वतंत्रता हुआ ।
इसलिए भारत के बापू कहलाए उनका प्रिय भजन था
रघुपति राघव राजाराम,पतित पावन सीताराम ।
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