स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता (कारण माला अलंकार पर आधारित)
विषय-शांति/अहिंसा/महात्मा गांधी
शीर्षक-गांधी जी की सीख
गांधी जी से सीखिए, सीखना जीवन आधार ।
जो सीखा सो पाया जग में,सत्य, अहिंसा विचार ।
सत्य सबसे महान अस्त्र, इससे जीत जहान ।
सत्य वादी सदा सुखी,सुख से मिले कल्याण ।
गांधी शांति के पुजारी, शांति से सबका विकास ।
विकास से सबको रोजगार, रोजगार से हर्ष उल्लास ।
उल्लास से पुरूषार्थ , पुरुषार्थ से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष ।
धर्म से ईश्वर दान, दया, हित, शिक्षा, संस्कृति ,संस्कार ।
संस्कार से विद्वता, विद्वता से गुण,दोष, परख हान,लाभ ।
गुण से गुणी मान मिले,दे आदर घर,परिवार,समाज ।
मानव एक सामाजिक प्राणी, रहता आया समाज ।
समाज से देश बना , देशहित राजनीति का काज ।
सच्चा मानव चाहिए जग को,जो समझे सबका भार ।
सच्चा मानव रुप लेकर, ईश्वर लेता धरा पर अवतार ।
अवतार पुरुष वो कहलाते,जो जग हित में करते काम ।
भारत भू ने जिसे माना,थे महात्मा गांधी जिनका नाम ।
व्याख्या-कवि के द्वारा गांधी जी की सीख और विचारों को
मानव के लिए अनुकरणीय एवं जीवनोपयोगी
माना है जिसे कारण माला अलंकार में वर्णन
किया है ।
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