Thursday, October 1, 2020

पुष्पा पटनायक की रचना- अहिंसा

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता(कारणमाला अलंकार)
शीर्षक -"अहिंसा"
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सत्य अहिंसा पर चलकर 
बापू ने था सिखलाया
सैकड़ों वर्ष की गुलामी को 
अहिंसा से आजाद कराया ।

उनके दिखाए मार्ग पर 
चलकर आजादी मिली 
फिर भी आज देखो 
मानव की करतूत ढीली 
असत्य,अशांति और भ्रष्ट
दुनिया  में आज हैं फैली ।

सपने उनके टूट रहे 
आज देखो सब छूट रहे
सत्य, अहिंसा और शांति
बस  नाम के  ही  गूंज  रहे ।

पर तुम मत भूलो 
यह वही अहिंसा है 
जिसने जंजीरों से 
जीवन को छुड़ाया था 
देश को स्वतंत्र कराया था ।

दौर फिर वहीं ले आओ 
फिर वही इतिहास रचाओ 
बापू के सपने साकार कर 
भारत  को  स्वर्ग   बनाओ  ।

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