स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता(कारणमाला अलंकार)
शीर्षक -"अहिंसा"
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सत्य अहिंसा पर चलकर
बापू ने था सिखलाया
सैकड़ों वर्ष की गुलामी को
अहिंसा से आजाद कराया ।
उनके दिखाए मार्ग पर
चलकर आजादी मिली
फिर भी आज देखो
मानव की करतूत ढीली
असत्य,अशांति और भ्रष्ट
दुनिया में आज हैं फैली ।
सपने उनके टूट रहे
आज देखो सब छूट रहे
सत्य, अहिंसा और शांति
बस नाम के ही गूंज रहे ।
पर तुम मत भूलो
यह वही अहिंसा है
जिसने जंजीरों से
जीवन को छुड़ाया था
देश को स्वतंत्र कराया था ।
दौर फिर वहीं ले आओ
फिर वही इतिहास रचाओ
बापू के सपने साकार कर
भारत को स्वर्ग बनाओ ।
🇳 🇮 🇨 🇪
ReplyDeleteVery nice though mem
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