Friday, October 30, 2020

महासमुन्द से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- शरद पूर्णिमा

नाम - पुष्पा गजपाल "पीहू"
जिला  -- महासमुंद
राज्य  -- (छ. ग.)
विषय - शरद पूर्णिमा
विधा  -  कविता

अमृतमय शरद का पूनम ,
        लगे  धवल रूप मनोहर ।
रजनी का तम दूर करे ,
        लगते  दूधिया   सरोवर।।
      
हो शरद  ऋतु का आगमन,
      धरते शीतलता  शबनम ।
 मोती    जैसे   चमक  लिए , 
      खिलते मानुष का तन-मन।।

द्वार-द्वार  घर सज जाये
     गगन पर चाँद मुस्काये।
सोलह कला से पूर्ण हो,
     शरद चाँद अमृत बरसाए।।

मुरलीधर  तान   सुनाए,
      लक्ष्मी मात भ्रमण पर जाए।
ब्रज   बालाएँ   बावरी  हो ,
       वृंदावन में रास रचाए
      
अम्बर  पर  चाँद  चमकता ,
    चाँदनी  खिलखिला जाती।
श्वेत  चादर  ओढ़े  धरा
    सारी  दुनिया   मुस्काती  ।।

शरद चाँद नहाए निशा,
      अपने यश पर इठलाती।
सारे ब्रम्हांड जगमग होते ,
      तम मोती स चमचमाती।।

सुब  सुहावन सुखद लगता,
       दमके  धरती  का आँचल  ।
 तरु   पात     ठहरते    बूँदें , 
        करते  आँखों  को घायल।।

मीठी   जाड़ा  दे    आंनद ,  
       दिनकर भी  खूब  सुभाए ।
मधुर - मधुर बहते  समीर , 
       सृष्टि  का  जीवन   हर्षाए  ।। 

नीलाम्बर  पावन  लगतें, 
       छटे  बादलों  का घेरा ।
नीड़  छोड़  उड़ते  पंछी , 
        स्वच्छंद  बनातें  डेरा ।।

फसलों  पर  पड़तीं   बूँदें ,
      हो   पकनें  को  तैयार।
बाग - बगीचा गदगद हो ,
     दे मीठे  फल  रसदार ।।

खेल - कूद और व्यायाम ,
     का करते  सभी अभ्यास ।
स्वस्थ्य शरीर बनाने का 
    करे मानुष सतत  प्रयास ।।

शरद मन भावन हो सदा,
      करते बसंत का स्वागत ।
सारी दुनिया  शीतल कर,
      ये  दूर  कहीं  हो जावत ।।

पुष्पा ग़जपाल "पीहू"
महासमुंद (छ. ग.)

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