Thursday, October 22, 2020

गरियाबंद से भुवेंद्र बघेल "दिलजला" की रचना- लुटाया बहुत

रचनाकार - भुवेंद्र बघेल "दिलजला"
जिला - गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
शीर्षक - लुटाया बहुत कुछ 
विधा - गीत 
है लुटाया बहुत कुछ तुम पे मगर 
फिर भी कहते तुम किया कुछ भी नही 

मैंने नींदे लुटाई रातभर जाग कर 
चैन खोया था मैंने तुम्हें देख कर 
मन को मंदिर तुझे मूरत मानकर 
तेरी पूजा किया था खुदा जानकर 
***
है लुटाया बहुत कुछ तुम पे मगर 
फिर भी कहते तुम किया कुछ भी नही

मैंने मांगी दुआएं की तुम खुश रहो 
और मंदिर मैं जाकर जलाये दीये
मैंन घर- बार भी छोड़ा तेरे लीये
ना सोचा कभी कुछ भी मेरे लिये

है लुटाया बहुत कुछ तुम पे मगर 
फिर भी कहते तुम किया कुछ भी नही

प्रेम में तेरे खोया है क्या क्या सनम 
सरपे तकिया लिये रोया हर-पल
टूटा दिल था मेरा हुई ऑंख नम 
फिर भी चाह तुझे मैंने हर दम......
******
है लुटाया बहुत कुछ तुम पे मगर 
फिर भी कहते तुम किया कुछ भी नही

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