Thursday, October 29, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- परिवर्तन

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - परिवर्तन
विधा - मुक्त
शीर्षक - परिवर्तन की बेला
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       // परिवर्तन की बेला //

समय ने ली अंगड़ाई यारों ,
नित्य नवीन परिवेश है ।
परिवर्तन की बेला आई ,
कोरोना का संदेश है ।।

रहन - सहन जीवन और प्रकृति ,
पूरा सिस्टम संशोधित ।
कोरोना से बचने हेतु ,
अकस्मात हर व्यक्ति जागृत ।।
खान - पान व्यवहार सभी ,
लगता कुछ - कुछ विशेष है ।
परिवर्तन की बेला .....।।1।।

सारी दुनिया मान रही है ,
भारतीय संस्कृति का लोहा ।
हाथ जोड़कर कहो नमस्ते ,
अभिवादन की रीति जहाँ ।।
हाथ मिलाना गले लगाना ,
इसका सर्वत्र निषेध है ।
परिवर्तन की बेला.....।।2।।

मास्क लगाना दूरी बनाना ,
हाथों को सेनिटाइजिंग ।
कोरोना का डर ही सही ,
लोगों में रियलाइजिंग ।।
स्वच्छता का डंका बज गया ,
सावधान देश - विदेश है ।
परिवर्तन की बेला.....।।3।।

नौकरी धंधा घर - परिवार ,
मजदूरों का मान बढ़ा है ।
परिस्थितियों से लड़ने का ,
हर किसी में नशा चढ़ा है ।।
जान बची तो लाखों पाये ,
आध्यात्मिकता का संकेत है।
परिवर्तन की बेला.....।।4।।

कोरोना तो हारेगा पर ,
सिखा दिया संसार ।
कृत्रिम और विलासी जीवन ,
करो नहीं स्वीकार ।।
पर्यावरण संस्कृति से नाता ,
सुख - शांति का स्रोत है ।
परिवर्तन की बेला.....।।5।।

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