सुंदरगढ़,ओडिशा
विधा-निबंध
विषय-स्कूली पाठ्यक्रम में पत्र लेखन का समावेश
पत्र लेखन एक कला है जिससे हम एक दूसरे से जुड़ते हैं।किसी दूर बैठे व्यक्ति से जब हम मौखिक तौर पे बात नही कर पाते तब अपनी बातों और विचारों को पत्र के माध्यम से पहुँचाते हैं।स्कूली पाठ्यक्रम में इसका समावेश करने का मुख्य कारण भी 16 वर्ष तक के बच्चों को इसका समग्र ज्ञान देना ही है ताकि भविष्य में उनको पत्र लेखन में समस्या ना आये।
ये बात बिलकुल सही है कि आज बच्चो को पत्र लेखन करना या सीखना पसंद नही है और यह सिर्फ परीक्षाओं तथा प्रतियोगिता तक ही सिमट कर रह गई है।आज का युग मोबाइल युग है कुछ ही पलों में हम अपनी बातों को दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचा सकते हैं।दुनियाभर की खबरें पल में हम तक पहुंच जाती है।सुविधाएं बढ़ गई हैं।
पर इन सबके बावजूद भी पत्र लेखन की महत्ता कम नही हुई है यह प्राचीन काल से चली आ रही है।पहले कबूतरों से सन्देश भेजा जाता था इसकी एक प्रजाति गिरहबाज कबूतरों को इस काम के लिए प्रशिक्षित भी किया जाता है।पैदल, घुड़सवार, हरकारे ,डाकिये आदि समय-समय पर संदेह वाहक बदलते गए पर पत्रों का महत्व है आज भी भारत मे लाखो पत्र लिखे जाते हैं।ऐसे गांव भी हैं जहां डाकिये को भगवान का दर्जा दिया जाता है जो उनके बेटा, पति या पिता का संदेश लेकर आता है।पत्र धरोहर हो सकते हैं परंतु एस एम एस के सन्देश नही क्योकि हम इन्हें लम्बे समय तक सहेज कर नही रख सकते।
पत्र लेखन के मुख्यतः दो प्रकार हैं पहला औपचारिक और दूसरा अनोपचारिक ।सरकारी संस्थाओं को हम आज भी पत्रों के माध्यम से ही अपनी बात बताते हैं।व्यक्तिगत पत्र में हम अपनी भावनाओ को बांटते हैं।वैसे तो पत्र लेखन के और भी कई प्रकार हैं पर इंटरनेट के कारण इनका उपयोग अब कम होने लगा है।नेहरू जी अपनी बेटी इंदिरा को जो पत्र लिखते थे वे आज भी पिता के पत्र पुत्री के नाम से संग्रहित हैं,महात्मा गांधी के पास पूरी दुनिया से पत्र आते थे और वे उन सबका जवाब भी देते थे।हमारे जितने भी महापुरुष हैं वे सब भी अपने विचारों को पत्रों के माध्यम से एक - दूसरे तक पहुंचाते थे।
यह हमारी विडंबना है कि आज की युवा पीढ़ी
पत्र लेखन में विशेष रुचि नही रखती तथा हर साल पढ़ने के बाद भी पत्र लेखन में त्रुटि करती हैं और सिर्फ परीक्षा में अंक पाने के लिए ही इसे पढ़ती है।इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना एक अच्छी कोशिश है तथा पत्र लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन भी आश्यक है।
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