Monday, October 12, 2020

प्रताप चंद साहू के दोहे

रचनाकार _ प्रताप चंद साहू
जांजगीर (तुलसी)- छत्तीसगढ़
ज्ञानदीप (दोहावली)२००३


१०. अल्ला अल्ला कहनै लगे,अल्लाहोअ न जान।
जो अल्ला के बंदे हों, खुद को ले पहचान।।

११. मरत नहीं वह हिन्दू, पूजै बकरी -भेड़।
राम भी पूजै ताको, मिटै र उन्की खेल।।

१२. विद्यार्थी मृदु सुभाऊ, गुरु वचन लिए शिश।
ताही जन आगै बढै, नेम नेह व सुशील।।

१३. सतै छात्र को लक्ष्णाय, मात -पिता सो दास।
रिपुवन सो मित्रन किजै, चाहत जन-जन आस।।

१४. रंक ऐसा सुभाइया, जैसे संत सुभाव।
सुख-दुख दोऊ पल है, फिर धुपन तोउ छांव।।

१५. साहित ऐसा ना होय, जा में नंग समाय।
सतै चरित्र सत जीवना, पाक-साफ ही आए।।

१६. सत्यता चिंतामणि हैं, जो चाहत सो पाए।
सतै राह को छोड़ तो, रौ-रौ नरक ही जाए।।

१७. सत्यता ऐसी ना मिलै, करो तपस्या व ध्यान।
आंख मूंद कर सबै दिन, लियो प्रभु का नाम।।

१८. जनेऊ महता भारी, जाने नाहीं लोग।
देखा मैं दोऊ धारी, एक सीधै एक चोर।।



No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...