ज्ञानदीप (दोहावली)२००३
१०. अल्ला अल्ला कहनै लगे,अल्लाहोअ न जान।
जो अल्ला के बंदे हों, खुद को ले पहचान।।
११. मरत नहीं वह हिन्दू, पूजै बकरी -भेड़।
राम भी पूजै ताको, मिटै र उन्की खेल।।
१२. विद्यार्थी मृदु सुभाऊ, गुरु वचन लिए शिश।
ताही जन आगै बढै, नेम नेह व सुशील।।
१३. सतै छात्र को लक्ष्णाय, मात -पिता सो दास।
रिपुवन सो मित्रन किजै, चाहत जन-जन आस।।
१४. रंक ऐसा सुभाइया, जैसे संत सुभाव।
सुख-दुख दोऊ पल है, फिर धुपन तोउ छांव।।
१५. साहित ऐसा ना होय, जा में नंग समाय।
सतै चरित्र सत जीवना, पाक-साफ ही आए।।
१६. सत्यता चिंतामणि हैं, जो चाहत सो पाए।
सतै राह को छोड़ तो, रौ-रौ नरक ही जाए।।
१७. सत्यता ऐसी ना मिलै, करो तपस्या व ध्यान।
आंख मूंद कर सबै दिन, लियो प्रभु का नाम।।
१८. जनेऊ महता भारी, जाने नाहीं लोग।
देखा मैं दोऊ धारी, एक सीधै एक चोर।।
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