राज्य -:- बिहार
कविता का शीर्षक - :-वोट हूंँ
विधा -:- कविता
हां ! मैं तो तुम्हारा वोट हूंँ,
लोकतंत्र की आधारशिला मैं,
वयस्कता पर सबको मिला मैं,
जनमत देता सबको दिला मैं,
राजनीति के डंके की चोट हूंँ ।
हां ! मैं तो तुम्हारा वोट हूंँ ।।
जनता का सच्चा मित्र हूंँ,
मतपत्र में बना चित्र हूँ,
या ईवीएम का बटन हूँ,
चुनाव का सिरमौर हूंँ ,
सबका ही मैं तो ठौर हूंँ,
लोकतंत्र की नोट हूँ ।
हां ! मैं तो तुम्हारा वोट हूँ ।।
पार्टी का हो कोई नेता ,
या निर्दलीय का अभिनेता ,
मैं ही सबको बहुमत देता ,
उच्च-नीच का भेद न लेता ,
चाहूं जिसे उसे सब कुछ देता ,
कुर्सी का मैं ही सच्चा मेट हूँ ।
हां ! मैं तो तुम्हारा वोट हूँ ।।
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