पता -------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय -----मुक्त
शीर्षक --- बलात्कारी के पक्ष में सुनवाई मत कर ...
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बेशक कर मोहब्बत , पर रूश्वाई मत कर !
वफ़ा को रख जिंदा , बेवफाई मत कर !
इबादत कर इश्क की , मगर याद रहे ,
इश्क शर्मिंदा हो , ऐसी आशनाई मत कर !
संबंधों में यूं ही है खाई बहुत ,
कुरेदकर उसमें , और गहराई मत कर !
घर - आंगन की शान होती है बेटियां ,
तन्हा लड़की को देखकर , बेहयाई मत कर !
बेदर्द ज़माना क्या जाने , दर्द तुम्हारा ,
अपना जख्म मिटाने की , दुहाई मत कर !
तड़पकर मर जाए, भले ही कोई सड़क पर ,
जी भर के ले लें तश्वीर, दवाई मत कर !
जज हो भले ही , किसी ऊंची अदालत के,
बलात्कारी के पक्ष में , सुनवाई मत कर !
अपने आवाम पर थोड़ा तरस खाओ हुक्मरानों,
ग़रीबी, बेकारी के दौर में , इतनी महंगाई मत कर!
मेरे खुदा सुन ले इतनी सी गुज़ारिश मेरी ,
महामारी ले रौद्र रूप , ऐसी पुरवाई मत कर !
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