Monday, October 5, 2020

चेतन सिंह की रचना- सुनवाई

रचनाकार -- चेतन सिंह
पता -------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय -----मुक्त
शीर्षक --- बलात्कारी के पक्ष में सुनवाई मत कर ...
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बेशक   कर  मोहब्बत ,  पर रूश्वाई मत कर !
वफ़ा    को  रख जिंदा ,  बेवफाई    मत कर !
इबादत   कर   इश्क की ,   मगर   याद  रहे ,
इश्क   शर्मिंदा  हो , ऐसी  आशनाई मत कर !
संबंधों     में   यूं     ही    है   खाई    बहुत ,
कुरेदकर  उसमें ,   और    गहराई   मत  कर !
घर - आंगन     की   शान   होती   है बेटियां ,
तन्हा  लड़की  को देखकर , बेहयाई मत कर !
बेदर्द  ज़माना  क्या   जाने ,     दर्द   तुम्हारा ,
अपना   जख्म मिटाने की ,  दुहाई  मत  कर !
तड़पकर   मर जाए, भले ही कोई सड़क पर ,
जी  भर के  ले  लें  तश्वीर,  दवाई   मत  कर !
जज   हो भले ही ,   किसी ऊंची अदालत के,
बलात्कारी   के पक्ष में ,  सुनवाई   मत    कर !
अपने आवाम पर थोड़ा तरस खाओ हुक्मरानों,
ग़रीबी, बेकारी के दौर में , इतनी महंगाई मत कर!
मेरे   खुदा   सुन   ले   इतनी  सी गुज़ारिश मेरी ,
महामारी   ले  रौद्र रूप ,   ऐसी पुरवाई मत कर !

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