रचनाकार का नाम: इन्दु साहू
राज्य: छत्तीसगढ़
जिला: रायगढ़
विषय: आनंद
विधा: मनहरण घनाक्षरी
8, 8, 8, 7 पर यति,
प्रति पद 31 वर्ण
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*कोई ढूंढे यहाँ-वहाँ, सारे जग में है कहाँ,
आनंद की तलाश में,
है जग भटक रहा।
कुछ ऐसा काम करो, खुशियाँ प्रदान करो,
सबका सम्मान करो,
क्यों तू अटक रहा।
कर्म हो सच्चे मन से, आनंदानुभूति हो,
मोह माया के भ्रम में,
क्यों तू लटक रहा।
स्वार्थ से ऊपर उठो, सदा नेक कर्म करो,
आनंद की तलाश में,
है जग भटक रहा।।1।।
*कर्म कुछ ऐसा करो, आनंद अनुभव हो,
देख जग प्रसन्न हो,
सदा तेरा मान हो।
कभी न निराश रहो, मन में सदा आस हो,
स्वयं पर विश्वास हो,
सबका सम्मान हो।
निज वाणी मिठास हो, कर्मपथ विकास हो,
स्वमन तेरे हाथ हो,
जग का कल्याण हो।
खुशियां व्याप्त रहे, सर्वत्र आनंद बसे,
जग में कभी कहीं,
नहीं अपमान हो।।2।।
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-इन्दु साहू,
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
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Friday, October 16, 2020
रायगढ़ से इन्दु साहू की रचना- आनंद
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