रचनाकार - पवन कुमार सेन
शहर/राज्य - कांकेर, छत्तीसगढ़
कविता का शीर्षक - मोर सुघ्घर गांव
ओ अमरइया अउ
ओकर छांव ।
नंदा गे हे मोर
नदिया तीर के सुघ्घर गांव ।।
आमा के डाली अउ
गोही के मार ।
खाले मे मेहा अउ
डाली म संगी-यार ।।
लुका-छिपी के खेल अउ
माटरा करे लाल ।
गांव के गली अउ,
माटी कन्हार
रही रही के आवथे,
मोला ख्याल ।।
तरिया के पार म
पीपर के पेड़ ।
डंडा पचरंगा म, संगी
लेवत रहिस घेर ।।
पड़की चिरई अउ
बइला पुछी के फांदा ।
भूंज के खाये संग
नुन अउ आलु कांदा ।।
बिहनिया ले लेकर
संझा के नाव ।
नंदा गे हे मोर
नदिया तीर के सुघ्घर गांव ।।
Friday, October 16, 2020
कांकेर से पवन कुमार सेन की रचना- मोर गांव
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