Wednesday, October 28, 2020

बिलासपुर से मोहित साहू की रचना- मोर पिरोही

नाम - मोहित साहू
जिला - बिलासपुर छग
शीर्षक - मोर पिरोही.. 
विधा - छंदमुक्त
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तोर जुदाई मोला मार डारिस,
तैं मइके म मजे से बइठे हस ।
तोर सुरता म मैं होगेंव आधा,
तैं पूछे नहीं मैं कइसे हंव ।

रात रात भर नींद नइ आवय,
कड़ेरी गिनत जागत हंव ।
तैं सूतत हस चैन के नींद,
मैं बैरी कस रात पहावत हंव।

हांस हांस के तैं सुग्घर,
भउजी तीर बतरावत हस।
मोला अपन मया सुरता म,
रात रात भर जगावत हस।

कालि आ जाहूं कहिके गय,
अब परनदिन बतावत हस,
फोन करे बर टाईम नइ पास,
आजकाल कहिके घुमावत हस ।

अन्न पानी तियागुल होगे,
घेरी बेरी सतावत हस ।
कब आबे मोर कोरा म,
कांही नहीं बतावत हस।

बईहा बरोबर मन ह लागे,
तन लकड़ी कस सुखावत हंव।
अब आजा रे तैं मोर पिरोही,
रो रो तोला बलावत हंव।
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मोहित साहू 
मरहीकापा

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