जिला - सरवाड़ अजमेर
शीर्षक- मुस्कुरा के जो
विधा- तुकबंदी छंद मुक्त कविता
*चंद अशआर मां के नाम*
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*मुस्कुरा के जो*
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*मुस्कुरा के जो गम को टाल देती है*
*जो मुश्किलों में हमें संभाल लेती है*
*कैसे बताऊं मर्तबा उसका लफ्ज़ों में*
*बिखर के जो हुस्नों जमाल देती है*
*जिस का एहसास है सारी कुदरत में*
*बन के जो सत रंगी मिसाल देती हैं*
*शहद से भी मीठी है जिस की जुबां*
*जो जवाबों को हमारे सवाल देती है*
*बलाओं से हिफाज़ती , उसकी परछाई*
*जब वो तन पे आंचल को डाल देती है*
*बुरा मैं भले ही हुआ पर वो अच्छी रही*
*जो हर बुराई पर मेरे परदा डाल देती है*
*मेरी बीमारी पे उसने किए कितने जतन*
*जो अपने प्यार से मरज निकाल देती है*
*दोजग में भी वो देती है जन्नत सा सुकून*
*जब अपने हाथों से हमें उछाल देती है*
*अनवर हुसैन सरवाड़ अजमेर*
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