Wednesday, October 28, 2020

सरवाड़ से अनवर हुसैन की रचना- मुस्कुरा के जो

नाम- अनवर हुसैन
जिला - सरवाड़ अजमेर
शीर्षक- मुस्कुरा के जो
विधा- तुकबंदी  छंद मुक्त कविता



*चंद अशआर मां के नाम*
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       *मुस्कुरा के जो*
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*मुस्कुरा  के  जो  गम  को  टाल देती है*
*जो  मुश्किलों  में  हमें  संभाल  लेती है*

*कैसे  बताऊं  मर्तबा  उसका लफ्ज़ों में*
*बिखर  के  जो  हुस्नों   जमाल  देती है*

*जिस का  एहसास  है  सारी  कुदरत में*
*बन  के  जो  सत रंगी  मिसाल  देती हैं*

*शहद से  भी  मीठी  है   जिस की जुबां*
*जो  जवाबों  को  हमारे  सवाल  देती है*

*बलाओं से हिफाज़ती , उसकी परछाई*
*जब वो तन पे  आंचल को डाल देती है*

*बुरा मैं भले ही हुआ पर  वो अच्छी रही*
*जो हर बुराई पर मेरे परदा डाल देती है*

*मेरी बीमारी पे उसने किए कितने जतन*
*जो अपने प्यार से मरज निकाल देती है*

*दोजग में भी वो देती है जन्नत सा सुकून*
*जब अपने  हाथों से  हमें  उछाल देती है*

*अनवर हुसैन सरवाड़ अजमेर*

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