Wednesday, October 28, 2020

छत्तीसगढ़ से प्रकृति कश्यप की रचना- अवकाश

नाम -  प्रकृति कश्यप
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - अवकाश
विधा -  नई कविता

*अवकाश*

जाने क्यों
ऐसा लगा
ईश्वर भी
कभी अवकाश चाहता होगा
मन की पीड़ा
दबाता होगा
फरियाद की लम्बी 
फेहरिस्त में
भाग्य में
उजाला भरते
नसीब का खेल
खेलते
ईश्वर भी कभी अवकाश चाहता होगा
छोटी छोटी बातो
पर रक्षक बनाते
समय चक्र
का उल्लंघन करते
केवल
कर्तव्य परायणता
का बोझ ढोते
ईश्वर भी कभी अवकाश चाहता होगा
मृत्युधर्मी प्राणी से
मुक्ति की कामना
 सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव
होने की पहचान से
परमार्थ धर्म पालन से
पाप पुण्य के 
बही खाते से
ईश्वर भी कभी अवकाश चाहता होगा।
प्रकृति कश्यप
बिश्रामपुर
जिला सूरजपुर छ. ग.

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