रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-मुक्तक
विषय-मोह (तदगुण अलंकार)
शीर्षक-मोह से बंधा
माया-मोह पे टिका ये संसार
जैसे यही हो जीवन का आधार
मोह वश करता मनुष्य हर
कर्म,काज और व्यापार
जीवन के अंतिम पड़ाव तक
मोह का साथ ना छूटता
मानव मन में कुत्सित वासनाएं,
दुर्भावनाएं मोह ही है भरता
होता जब मोह अपनों से
सत्कर्म मानव से है करवाता
पर होता जब मोह पैसों से
दुष्कर्मों से घिर जाता
मोह को जो त्याग दे
संत, ज्ञानी वो कहलाता
इस बंधन में जो बंध जाये
पशु प्रवृत्ति से वो भर जाता।
No comments:
Post a Comment