जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - चिड़िया का घोंसला
विधा - आलेख
शीर्षक - संसार और जीवन की नश्वरता
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// संसार और जीवन की नश्वरता //
एक - एक तिनका खोज - खोजकर चिड़िया लाती है और बड़े जतन से छोटा - सा प्यारा - सा घोसला बनाती है । उसी घोसले में रहती है व बच्चे देती है अर्थात अपना परिवार पालती है । वही उनका संसार है , उनके जीवन का सर्वस्व है । लेकिन कब तक ? प्रकृति बड़ी कठोर होती है । बेचारी चिड़िया दिन भर मेहनत करती है , भटकती है और अपने बच्चों को खिलाती है , पालन - पोषण करती है । वह अपना कर्तव्य निष्ठापूर्वक निभाती है । इसके बाद भी नाना प्रकार के खतरों का भय सताती है । बड़े और शिकारी पक्षी , साँप ,बन्दर , बरसात , आँधी - तूफान आदि का डर हमेशा बना रहता है । आखिर में तो मौत का पंजा लगेगा ही ।
ईश्वर और प्रकृति का यही विनाशकारी चोट है । नश्वरता व क्षणभंगुरता से आज तक कोई नही बचा ओर न ही कोई माई का लाल बच सकता है । यह शरीर ,जीवन और संसार परिवर्तनशील व अनित्य है । नाश होना और बदलना हर वस्तु का स्वभाव है । चिड़िया के घोसले की तरह सब कुछ अस्थायी है । सब दिखने भर को है , यूँ ही पसार हो रहा है । एक मधुर व भयानक सपने की नाई आभासित होती है ।
तात्पर्य यह है कि हम भी उसी चिड़िया के पड़ोसी हैं । हम भी अपने जीवन को सजाते हैं , सँवारते हैं और न जाने क्या - क्या व्यवस्था करते रहते हैं पीढ़ियों तक के लिए । सारा जीवन व सारी योग्यता दाँव पर लगा देते हैं फिर भी अंत मे देखो तो हताशा , निराशा ,अतृप्ति , चिंता , तनाव एवं दुःखों का पहाड़ ही हाथ लगता है । क्रूर मौत का ताण्डव तो बचा - खुचा अस्तित्व ही स्वाहा कर देता है । रावण , कंस , हिटलर जैसे बड़े - बड़े राजे - महाराजे समय की धारा में कहाँ बह गए ? कोई पता नहीं । सब नहीं की तरफ जा रहा है ।
एक आत्मा ही अबदल और अविनाशी है । वही परमात्मा है , ईश्वर है , भगवान है , जगदम्बा है ,गॉड है , अल्लाह है । चाहे जो भी नाम दो , है वही परम दिव्य सत्ता । केवल और केवल वही सत्य है , अनंत है , चेतन है , ज्ञानस्वरूप है, आनंदस्वरूप है , अक्षर है , अविनाशी है और सबके परम सुहृद है । बाकी सब चिड़िया का घोंसला है ।
नश्वर काया नश्वर दुनिया ,
जीवन पानी का बुलबुला है ।
तिनका - तिनका बिखर जाएगा ,
चिड़िया का ये घोंसला है ।।
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