Tuesday, October 6, 2020

संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- मोह

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-  कविता
शीर्षक- मोह का प्रभाव

               मोह का प्रभाव

जीवन पर पड़ता है, मोह का बड़ा प्रभाव।
बिन मोह के आदमी को, प्रेम का अभाव ।
प्रेम का अभाव, नहीं    किसी पर लगाव ।
घर-परिवार, दुनियादारी  न कभी तनाव ।
कह "प्रधान" कविराय,  मुक्त उनका मन ।
कैसे कोई जी पाएं, बिन मोह का जीवन ।

तन-मन-धन का , सबका अपना मोह ।
इसको पाने सबको, लेना  पड़ता लोह ।
लेना पड़ता लोह, फंसाना पड़ता चाल में ।
बिन इसके उन्नति,  होती नहीं हर हाल में।
कह "प्रधान" कविराय, ऐसा होता है मन ।
मोह-माया के ज्वाला में जले सारा तन ।

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