Friday, October 23, 2020

महासमुन्द से द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- शीतलता

द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"शीतलता”
विधा-कविता(तुकांत)
          ***
शीतलता का गुण सभी को,
शांत चित्त देता है स्वभाव।
संयमित जीवन में रहता है,
प्रेम और सद्भावना का भाव।।

शीतल मंद सुगंध पवन से,
तन मन में नई स्फूर्ति आय।
शांत मधुर वाणी है औषधि,
सुनकर मन की कुण्ठा जाय।।

गुण सदा ही शीतलता का,
तेजोमय उन्माद दूर कराय।
तपती धूप में जला हुआ तन,
शीतल जल से मन तृप्ति पाय।।

शीतल ओस के बूँद घास पर,
पड़े तो शीख पर मोती सुभाय।
हरितिम अंग जो सजे श्रृँगारित,
नयनन को सुंदर दृश्य लुभाय।।
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