स्थान- बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा-निबंध ।
शीर्षक- स्कूली पाठ्यक्रम में पत्र-लेखन का समावेश ।
मानव जाति में जब ज्ञान व शिक्षा का विस्तार हुआ और अपनी जीवन- शैली संचार माध्यमों का उपयोग करने लगा था ।मानव को अपने विचारों से अवगत कराने के लिए अथवा किसी बात को लिखित रूप में कहने या पहुँचाने के लिए पत्र-लेखन का प्रयोग करने की जरूरत होती थी ।राज्य सरकार या राजा लोग अपने राजदूत के माध्यम से दूसरे स्थान पर या राज्य को लिखित संदेश भेजते थे ।इस प्रकार से संचार के क्षेत्र में पत्र-लेखन का महत्व बढ़ने लगा ।यह संदेश भेजने का एक सशक्त माध्यम के रूप प्रयोग होने लगा ।वैसे बहुत पहले सेना में पत्र-लेखन का उपयोग संदेश भेजने के लिए किया जाता था ।जैसे-जैसे मानवीय संबंधों व आवश्यकताओं का विस्तार व विकास हुआ,उसके साथ- साथ भी पत्र-लेखन भी मानव जाति के लिए एक लिखित सन्देश देने का माध्यम बन गया ।फिर बाद इसके महत्व को बढ़ते हुये देखने के कारण इसके लिए शासन के द्वारा एक विभाग ही खोल दिया गया ।जिसका नाम "डाक व तार "विभाग रखा गया ।किंतु संचार क्रांति के तार का प्रयोग वर्तमान समय में बंद कर दिया गया है ।इस कार्य के लिए विभाग के द्वारा पत्रों को एकत्रित करने के लिए 'लाल डिब्बा 'का प्रयोग करते हैं,जिसे 'लेटर -बाक्स 'कहते हैं ।संचार माध्यमों में एक 'दूरसंचार विभाग 'विभाग भी होते हैं ।किन्तु समयानुसार उपयोगिता के आधार पर कार्य प्रणाली में बदलाव होते रहते हैं ।वर्तमान समय में प्राईवेट डाक सेवा के क्षेत्र में "कोरियर सेवा "की भी सुविधा चालू है ।छात्रों को पत्र-लेखन प्रकिया को जानने के पूर्व इसकी भी जानकारी होना जरूरी है ।
वर्तमान समय में शिक्षा पद्धति में बदलाव होते रहते हैं जिसके कारण पाठ्यक्रम में पाठ्य सामग्री का समावेश कब,किस कक्षा में करना है ।समय समय पर शिक्षाविद द्वारा कियां जाता है ।शासन द्वारा भी नवीन पाठ्यक्रम में शामिल होने वाली पाठ्य सामग्री का परीक्षण भी किया जाता है ।हम जब पढ़ा करते थे तो उस समय कक्षा तीसरी से ही पत्र-लेखन का पाठ्य पुस्तकों में विषय शामिल था ।जिससे उस समय के विध्यार्थी गण में पत्र-लेखन का अभ्यास हो जाता था और वे माता-पिता,मित्र व प्रधानपाठक को छुट्टी के लिए आवेदन पत्र लिखने की कला सीख जाते थे ।जिससे पत्र में लिखने वाले आदरसूचक शब्दों का प्रयोग करना भी सीख जाते थे ।जो उनके भावी जीवन में भी काम आता था ।पत्र-लेखन का जानना ज़रूरी है ।
आज के परिवेश में पत्र-लेखन का महत्त्व ज्यादा हो गया है,क्योंकि व्यवसायिक क्षेत्र हो या शासकीय व निजी क्षेत्र सभी के लिए पत्र -लेखन,पत्र-व्यवहार आवश्यक हो गया है ।आज प्रतिस्पर्धा का युग है जिसमे उत्कृष्ट कार्यशैली का होना नितांत आवश्यक होता है ।इसी कारण से मेरा मानना है कि स्कूली शिक्षा में पत्र-लेखन का समावेश प्रायमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक के पाठ्यक्रमों में होना जरूरी है ।जिससे छात्रों में पत्र-लेखन की उपयोगिता मालूम हो जायेगी ।पत्र -लेखन की अलग-अलग पद्धति होती है ।अंग्रेजी भाषा व हिन्दी में लिखने की शैली भी भिन्न होती है ।इसके अलावा पत्रों के अनुसार,उनके प्रारुप भी अलग-अलग हिस्सों में विभक्त रहते हैं ।इनमें पत्र के विषय के आधार पर भाषा-शैली व शब्दों,वाक्यांशों,सम्बोधन का भी उचित प्रयोग करते आना जरूरी होता है और प्रभावशाली पत्र लिखने में महारत हासिल की जा सकती है ।
इलेक्ट्रानिक मीडिया ने पत्र -लेखन,पत्र-व्यवहार में एक संचार क्रांति ला दी है ।कम्प्यूटर के आ जाने से पत्र लेखन शैली बहुत आसान हो गई है,क्योंकि इस उपकरण में ही इससे संबंधित जानकारी पूर्व से ही संग्रहण किये होती है ।इसके लिये सिर्फ़ उसी अनुरुप सीखने व अभ्यास की जरूरत होती है ।
अन्त में यह कहना चाहता हूँ कि स्कूली शिक्षा में पत्र-लेखन का पाठ्य पुस्तकों में समावेश,पाठ्यक्रमों में होना जरूरी है और इसका व्याहारिक प्रयोग करने के लिए लिखित अभ्यास करवाना भी उतना ही ज्यादा जरूरी है ।आज आसानी से पाठ्य सामग्री व सुविधाएँ छात्रों को उपलब्ध हो जाने के कारण विषय सामग्री का अध्ययन गंभीरतापूर्वक नहीं करते हैं ।जबकि आज रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं और अति -प्रतिस्पर्धा व चुनौतियों के कारण भी पत्र -लेखन का महत्व बढ़ गया है ,साथ ही साथ आज प्रभावशाली पत्र-लेखन व बायोडाटा को तैयार कर सकने में सक्षम होना जरूरी है ।इस हेतु शिक्षकों को भी वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए इस विषय क्षेत्र में अपने अध्यापन कार्य में पाठ्य सामग्री के रूप में गंभीरतापूर्वक ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है ।एक सशक्त नागरिक समाज व देश के विकास के लिए बनाने में शिक्षक का अहम् योगदान होता है ।पत्र-लेखन सामाजिक सरोकारों,राजनैतिक दलों,विदेशी-संबंधों,शासकीय कार्य व निजी क्षेत्र सभी क्षेत्रों में इसका महत्व बढ़ गया है और लिखित संवाद-संचार का भी कानूनी दृष्टि से अत्यधिक महत्व है ।शिक्षकों को छात्रों पत्र-लेखन के प्रति रूचि जाग्रत करने की नितांत आवश्यकता है ।
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