रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - जलप्रपात एवं प्राकृतिक सौन्दर्य वर्णन
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - जलप्रपात
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// जलप्रपात //
जलप्रपात की सुंदरता ,
सर्वाधिक होते आकर्षक ।
मन्त्र मुग्ध हो जाते हैं ,
सारे यात्री पर्यटक ।।
ऊर्ध्वाधर चट्टान वृहत पर ,
जल धारा की नर्तन ।
घोर निनाद दूर तक जाए ,
बिना मेघ कंपित गर्जन ।।
ऊपर से जल गिरते - गिरते ,
बूंद नहीं केवल धुँआ ।
अति मनभवान देख - देख ज्यों ,
स्वप्न लोक की सैर हुआ ।।
जल फुहार की ठंडक से ,
छू मंतर हो जाते थकान ।
दूध सफेदी सम जलधारा ,
नैनों को देते विश्राम ।।
चित्रकोट धुआंधार तीरथगढ़ ,
जोग वजराई कपिलधारा ।
रिब्बन नियाग्रा कुंचीकल ,
ऐसे कई जलप्रपात जो न्यारा ।।
जलप्रपात की प्राकृत छटा ,
आनंदानुभूति की खान है ।
धरती की शोभा - श्रृंगार यह ,
सृष्टि का वरदान है ।।
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Thursday, October 15, 2020
बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- जलप्रपात
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