Wednesday, October 7, 2020

संतराम कुम्हार की रचना- जीवन

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  "अनमोल जीवन " 
     विधा - छंदमुक्त कविता 
अलंकार - परिसंख्या अलंकार 
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माना हीरे मोती अनमोल है। 
पर जिंदगी का कोई न तोल है। 
अनमोल जीवन मानव का यह, 
मुख में जय श्रीराम के बोल है।।

जन्म मिला मानव योनि में, 
मानवता का धर्म निभाते जाना। 
जीवन के हर क्षण-क्षण को, 
सत्कार्य में निरंतर लगाते जाना।।

कहता सब तू मेरा है। 
पर आत्मा ही बस तेरा है। 
जिंदगी के इस कालचक्र में, 
सुकर्म-कुकर्म का ही घेरा है।। 

अहमियत जीवन का समझकर, 
रास्ते बूरे छोड़ तू। 
तन पर अभिमान छोड़कर, 
परमात्मा से रिश्ता जोड़ तू।। 

चारों धाम घूम ले तू, 
ईश्वर का एक ही रुप है।
माता-पिता की सेवा करले,
वो ही भगवान स्वरुप है।। 

ध्यान लगा ले चरणों में उनके, 
जीवन सफल हो जायेगा। 
जीवन का तू मोल समझ ले, 
स्वर्ग में स्थान पायेगा।। 

जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं, 
कब छोड़ चला जायेगा। 
काम न आये तेरा धन और दौलत, 
कर्म ही पहचान बनायेगा।। 

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परिसंख्या अलंकार का प्रयोग -
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1. माना हीरे मोती अनमोल है। 
पर जिंदगी का कोई न तोल है।
2. कहता सब तू मेरा है। 
पर आत्मा ही बस तेरा है। 
3. चारों धाम घूम ले तू, 
ईश्वर का एक ही रुप है।
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मौलिक रचना (स्वरचित) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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